दहेज़ प्रथा पर निबंध – Essay on Dowry System in Hindi

दहेज वो चीज़ है जो मुख्यता दुल्हन पक्ष के द्वारा दूल्हे पक्ष को दी जाने वाली नगदी, सम्पति, आभूषण आदि अन्य कीमती चीज़ो को दहेज कहा जाता है। ये प्रथा सदियो से चली आ रही है। दहेज प्रथा हमारे समाज के लिए अभिशाप है तथा समाज की प्रमुख कुरीतियो मे से एक है।

दहेज़ प्रथा पर निबंध (150 से 250 शब्द)

दहेज समाज की एक बहुत बडी और प्रमुख समस्या है। इस कुप्रथा का अगर समय रहते हल नही निकाला गया तो आने वाले समय मे ये बहुत अनिष्टकारी सिद्ध होगा। दहेज मे कन्या पक्ष के लोगो द्वारा लडके वालो को कुछ धन, सामान, गहने, आभूषण, फर्नीचर, वस्त्र आदि महंगे उपहार दिये जाते है। दहेज हमारे समाज मे एक अभिशाप है। कन्या पक्ष के लोग ना चाहते हुए भी दहेज की रकम आदि को किसी तरह से व्यवस्थित करके वर पक्ष वालो को देते है। यह प्रथा हमारे समाज मे कई बुराईयो को जन्म दे रही है। दहेज प्रथा के कारण कन्या पक्ष वालो के ऊपर आर्थिक तंगी का बोझ आ जाता है जिससे निकल पाने मे उसको बहुत समय लग जाता है। जो धनी है उनके लिए तो नही परंतु जो गरीब वर्ग के लोग है। उन परिवारो के ऊपर दहेज का बोझ बहुत भारी पड जाता है जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बहुत दयनीय हो जाती है। यह प्रथा समाज मे लडकियो के प्रति नकारात्मकता का प्रभाव बढाती है। गरीब परिवार के कभी – कभी इस प्रथा के कारण अपने लडकी के विवाह मे दूसरे से कर्ज भी लेना पडता है।

दहेज प्रथा के कारण लडकियो को मानसिक प्रताडना का भी सामना करना पडता है। अक्सर देखा गया है कि मांग की गई दहेज राशि अगर नही दी जाती है तो उसका नुकसान बेचारी बेटियो को मानसिक रूप से झेलना पडता है। अगर इस कुप्रथा से मुक्त होना है तो हम सभी को संकल्प लेना पडेगा कि इसका पूरे समाज मे विरोध करना पडेगा। हमारी सरकार ने इस प्रथा के खिलाफ कानून बनाया है लेकिन हम सभी को मिलकर समाज मे जागरुकता पैदा करनी पडेगी तभी जाकर इससे हमे मुक्ति मिल सकती है। लोगो को इसके प्रति जागरुक करने से ही इस समस्या से निपटा जा सकता है।

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Dowry Essay in Hindi – दहेज़ प्रथा पर निबंध (300 से 450 शब्द)

प्रस्तावना

दहेज प्रथा एक ऐसी समस्या व कुप्रथा है जो हमारे समाज के विकास और स्थिति मे बाधा डाल रही है। यह प्रथा भारत के कई हिस्सो मे फैली हुई है। शादी के समय कन्या पक्ष की ओर से वर पक्ष को दिया जाने वाला उपहार, धन आदि सम्पति को दहेज कहा जाता है। इसी कुप्रथा के कारण लडकियो को आज भी बोझ माना जाता है। अगर परिवार मे लडकी का जन्म हो जाये तो लोग इसको अपना दुर्भाग्य मानने लगते है। इस प्रथा के कारण ही लडकी के माता – पिता पर आर्थिक और मानसिक बोझ बढ जाता है।

दहेज प्रथा क्या है?

शादी के समय लडकी पक्ष की तरफ से लडको के पक्ष को दिया जाने वाला नगदी, सम्पति, आभूषण, वस्त्र, उपहार, गाडी आदि दहेज कहलाता है। दहेज प्रथा समाज के लिए एक बहुत बडा संकट है जिसका निदान हम सभी लोगो की प्राथमिकता है।

दहेज प्रथा के मूल कारण

दहेज प्रथा का मूल कारण अशिक्षा और जागरुकता का अभाव तथा पुरुष की प्रधानता है। यह एक ऐसी स्थिति होती है। जिसमे माता – पिता ना चाहते हुए भी दहेज देने को मज़बूर है। आर्थिक और सामाजिक असमानता भी इस कुप्रथा का एक कारण भी है।

दहेज प्रथा के परिणाम

दहेज प्रथा ने समाज को बहुत नुकसान पहुंचाया है। इसके कारण ही कन्या पक्ष वालो को बहुत बडी आर्थिक समस्या का सामना करना पडता है जिसके कारण बहुत समय तक वो सामान्य जीवन नही जी पाता है। इस प्रथा के कारण कई बार लोग मानसिक रूप से बीमार भी हो जाते है तथा कई लोग कर्ज भी ले लेते है जिसका उच्च ब्याज दर उनके लिए एक बहुत बडी समस्या को जन्म देता है। कई लोग तो अपनी दिल के करीब चीज़ो को भी विवाह के लिए बेच देते है कि उनकी बेटी की शादी मे कोई दिक्कत ना आने पाये। समय रहते अगर इसकी रोकथाम के लिए उचित कदम नही उठाया गया तो भविष्य मे ये एक बहुत बडी समस्या का रूप ले लेगा। आइये हम सब मिलकर दहेज ना लेंगे ना देंगे का संकल्प ले और समाज मे लोगो को इससे होने वाली समस्या के प्रति जागरुक करे ताकि लोग दहेज की कुप्रथा के बारे मे जाने और इस बुराई को जड से खत्म करने के लिए आगे बढे।

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निष्कर्ष

दहेज प्रथा एक बहुत बडी सामाजिक बुराई है जो समाज को कलंकृति कर रही है। समाज को जागरुक करने की जरुरत है और सबसे जरुरी यह है कि हम भी अपनी नई पीढी के लोगो को इस कुप्रथा के प्रति जानकारी दे ताकि वो भी हमारी दहेज प्रथा के खिलाफ मुहिम मे शामिल हो। सरकार भी इसके खिलाफ बहुत सकिय है परंतु हम सभी को मिलकर समाज से इस दहेज प्रथा की समस्या को जड से खत्म करने के लिए संकल्प लेना है।

दहेज़ प्रथा पर निबंध – Essay on Dowry System in Hindi (500 शब्द)

प्रस्तावना

दहेज प्रथा वो सामाजिक कुरीति य कुप्रथा है जो समाज को धीरे – धीरे खोखला कर रही है। यह प्रथा आज हमारे समाज मे महामारी का रूप ले चुकी है। यह हमारे समाज के विकास मे बाधक है। इस प्रथा के कारण ही समाज मे लडकियो के साथ भेदभाव किया जाता है। दहेज प्रणाली हमारे भारत के साथ – साथ विश्व के कई समाजो मे भी प्रचलित है।

दहेज प्रथा समाज के लिए श्राप है

दहेज प्रथा समाज के लिए एक अभिशाप है। जिसका समय रहते निदान बहुत आवश्यक है। इस कुरीति के कारण समाज मे कई अन्य समस्याओ का जन्म तेज़ी से हो रहा है। अगर इस समस्या से मुक्ति पाना है तो हमे लोगो मे सामजिक चेतना और इस कुप्रथा से होने वाले दुश्प्रभाव के बारे मे लोगो को जागृत करना पडेगा। तथा महिलाओ की शिक्षा और स्वतंत्रता भी इस कुप्रथा से काफी हद तक निपटने मे मदद करेगा। दहेज प्रथा से होने वाले कुछ मुख्य दुष्परिणाम –

1 – आर्थिक कमज़ोरी

दहेज प्रथा के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत कमज़ोर हो जाती है जिसके कारण माता – पिता मानसिक रूप से बहुत परेशान हो जाते है। दहेज देने के लिए परिवार के लोग कही ना कही से धन आदि की व्यवस्था करके दहेज की रकम को पूरा करते है जिसके कारण वो आर्थिक रूप से उनकी स्थिति बहुत दुखद हो जाती है।

2 – मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान

दहेज की रकम को पूरा करने के बाद माता – पिता मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान होने लगते है। कौन किस तरीके से रकम की व्यवस्था करता है यह कह पाना सम्भव नही क्योकि आज के समय मे धन की अधिकता बहुत कम लोगो के पास होती है बाकी गरीब वर्ग के लोगो आज भी व्यवस्था करने मे परेशानी का सामना करना पडता है।

3 – मानसिक तनाव को बढावा

अक्सर ससुराल मे लोग दहेज लाने वाली बहू की तुलना किसी अन्य ज्यादा दहेज लाने वाली बहू से करके उसको मानसिक तनाव देते है। जिसका असर उसके ऊपर बहुत दिनो तक रहता है। तथा बिटिया को अपने तथा अपने परिवार के लोगो के लिए दुख भी होता है। कि काश मै भी बहुत सारा दहेज ला पाती। ये सारी बाते उसके दिमाग मे चलती रहती है। जो मानसिक रूप से उसको बहुत परेशान करती है।

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4 – शारीरिक प्रताड़ना

ससुराल मे बेटियो का शारीरिक शोषण तो आजकल एक आम बात हो गया है। ससुराल के लोग अपनी बहू को अपमानित करने का कोई मौका नही छोडते है। इस शारीरिक शोषण का एक प्रमुख कारण दहेज ना दे पाने की क्षमता भी है। क्योकि बहुत से माता – पिता दहेज की धनराशि को पूरा कर पाने मे सक्षम नही हो पाते जिसका परिणाम उनकी बेटी को शारीरिक और मानसिक रूप मे परेशान किया जाता है।

निष्कर्ष

दहेज प्रथा एक बहुत ही निंदनीय प्रथा है इसकी जितनी आलोचना की जाये कम है। इस कुप्रथा को समाप्त करने के लिए हम सभी लोगो को आगे आकर इसके खिलाफ लोगो मे जागरुकता पैदा करनी चाहिए। सरकार ने इसके खिलाफ कानून भी बनाया है। लोगो को इस बुराई के बारे मे अवगत कराकर समाज से इसको जल्द से जल्द खत्म करना चाहिए। दहेज प्रथा एक अभिशाप है तथा हमारे समाज मे निहित बुराईयो मे से ये एक प्रमुख बुराई है जिसका जल्द से जल्द खात्मा बहुत जरूरी है नही तो आने वाले समय मे इसका भयानक परिणाम व्यक्ति को जीने नही देगा।

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